Sunday, August 19, 2012

डूबते वक़्त बस इतना याद रखना
सुबह फिर आएगी रौशनी लेकर
वक़्त की मित्रता पराक्रमियों से है 
उनसे नहीं जो रोते हैं किस्मत को लेकर 

Sunday, August 5, 2012

किसान और भूख

खेत जोतकर फसल बोकर कोई पहचान नहीं
आत्महत्या करते ही सरकार उसे किसान कर देती है

हरा सोना उगलती ज़मीन को ये बेबस मौतें
प्रजातंत्र की खामियों का निशान कर देती है

कितनी अभद्र हैं ये सरकारी नीतियां
एक कटोरे चावल को सोने की खान कर देती है

माननीयों की झोलियाँ भरती योजनायें
भूख और नंगेपन को जवान कर देती है