खेत जोतकर फसल बोकर कोई पहचान नहीं
आत्महत्या करते ही सरकार उसे किसान कर देती है
हरा सोना उगलती ज़मीन को ये बेबस मौतें
प्रजातंत्र की खामियों का निशान कर देती है
कितनी अभद्र हैं ये सरकारी नीतियां
एक कटोरे चावल को सोने की खान कर देती है
माननीयों की झोलियाँ भरती योजनायें
भूख और नंगेपन को जवान कर देती है
आत्महत्या करते ही सरकार उसे किसान कर देती है
हरा सोना उगलती ज़मीन को ये बेबस मौतें
प्रजातंत्र की खामियों का निशान कर देती है
कितनी अभद्र हैं ये सरकारी नीतियां
एक कटोरे चावल को सोने की खान कर देती है
माननीयों की झोलियाँ भरती योजनायें
भूख और नंगेपन को जवान कर देती है
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